COVID -19 महामारी से लड़ने के लिए कई नैदानिक परीक्षण चल रहे हैं और इनमें से एक है प्लाज्मा थेरेपी या कंवलसेंट प्लाज्मा थेरेपी (Convalescent Plasma Therapy) (CPT). आखिर प्लाज्मा थेरेपी क्या है, यह कैसे काम करती है, इसका इतिहास और क्या यह COVID-19 के उपचार में सहायक हो सकती है? आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं.
COVID-19 के लिए अभी तक कोई सटीक इलाज नहीं खोजा गया है. लेकिन वायरस के प्रसार को निष्क्रिय करने वाली वैक्सीन, प्रमुख एंटीजन्स के एंटीबॉडीज, मोनोक्लोनल और आरएनए आधारित वैक्सीनों के विकास में भी प्रगति दर्ज की गई है. कुछ स्थानों पर कंवलसेंट प्लाज्मा थेरेपी या प्लाज्मा थेरेपी भी शुरू कर दी गई है.
आइये अब कंवलसेंट प्लाज्मा थेरेपी (CPT) या प्लाज्मा थेरेपी के बारे में जानते हैं?
जब रोगजनक हमारे शरीर पर हमला करते हैं, तो हमारा इम्यून सिस्टम काम करना शुरू कर देता है और संक्रमण से लड़ने के लिए प्रोटीन निकालता है. इन प्रोटीनों को एंटीबॉडी के रूप में जाना जाता है. यदि संक्रमित व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का उत्पादन करता है, तो वह एंटीबॉडी द्वारा खुद ही ठीक हो जाएगा.
प्लाज्मा थेरेपी में COVID-19 से ठीक हुए व्यक्ति का रक्त, जो कि एंटीबॉडी में समृद्ध है, अन्य गंभीर रूप से बीमार लोगों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है. इसके तहत ठीक हो चुके लोगों के प्लाज्मा को मरीजों से ट्रांसफ्यूज किया जाता है. इस थेरेपी में एटीबॉडी का उपयोग किया जाता है, जो कि किसी वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ शरीर में बनता है. यह एंटीबॉडी COVID-19 ठीक हो चुके मरीज के शरीर से निकालकर बीमार शरीर में डाल दिया जाता है. मरीज पर एंटीबॉडी का असर होने पर वायरस कमजोर होने लगता है. इसके बाद मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है
प्लाज्मा क्या है?
रक्त का तरल हिस्सा प्लाज्मा है. यह पानी और प्रोटीन से बना होता है. यह लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स को शरीर के माध्यम से प्रसारित करने के लिए एक माध्यम प्रदान करता है. इसमें इम्युनिटी के महत्वपूर्ण घटक भी होते हैं जिन्हें एंटीबॉडी के रूप में जाना जाता है.
कंवलसेंट प्लाज्मा थेरेपी या प्लाज्मा थेरेपी कैसे काम करती है?
इस तकनीक में, COVID-19 से ठीक हुए मरीज से रक्त निकाला जाता है. फिर सीरम को अलग किया जाता है और वायरस को बेअसर करने वाली एंटीबॉडी के लिए जांच की जाती है. सीरम जिसमें एंटीबॉडीज हैं को COVID-19 के रोगी को दिया जाता है, जिनमें गंभीर लक्षण पाए जाते हैं.
ह्यूस्टन मेथोडोलॉजिस्ट (Houston Methodologist) के अनुसार, प्लाज्मा दान करने की प्रक्रिया में लगभग एक घंटे लगते हैं, जैसे की रक्त दान के दौरान लगते हैं. ऐसा कहा जाता है कि प्लाज्मा के डोनर्स को एक छोटे उपकरण से जोड़ दिया जाता है, जो प्लाज्मा को निकालता है, साथ ही साथ लाल रक्त कोशिकाओं को उनके शरीर में लौटाता है. वहीं नियमित रक्त दान के दौरान, डोनर्स को दान करते वक्त के बीच लाल रक्त कोशिकाओं की प्रतीक्षा करनी पड़ती है. प्लाज्मा के मामले में, इसे बार-बार दान किया जा सकता है, यानी कि सप्ताह में दो बार.
शोधकर्ताओं के अनुसार, प्लाज्मा थेरेपी इतनी सरल नहीं होगी. COVID-19 के मामले में जी कि एक नई महामारी है जहां अधिकांश रोगी वृद्ध हैं और पहले से ही उच्च रक्तचाप, मधुमेह इत्यादि जैसी अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं, इसलिए यह थेरेपी कितनी प्रभावशील होगी रिसर्च के बाद ही पता चल पाएगा.

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